एक कविता - “आमार शोनार बांगला”

निनाद गाथा गूँजा था वन्दे मातरम का गान जहाँ से, गुरूदेव ने दी थी हमें पहचान जहाँ से, ये शस्य श्यामला, विवेकानंद की धरती, साहित्य में डूबी है शरदचंद्र की धरती, चैतन्य महाप्रभु के अदभुत प्रकाश ने, हमको दिखाई राह जहाँ थी सुभाष ने, उड़ती हैं खुशबुएं जहाँ गंगा की छाँव... [पूरी पोस्ट]
writer अभिनव

कविताएं

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[03 Sep 2009 19:12 PM]

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