इनका रूप संवर सकता है

निनाद गाथा एक बार लखनऊ से इलाहबाद जाते समय एक मजदूरनी सामने आ कर बैठ गयी. उसे आस पास के सभी लोगों नें बड़ी हेय दृष्टि से देखा और सब थोडा थोडा सरक गए. न जाने तभी कहाँ से ये भाव उड़ते हुए आये और काग़ज़ पर उतर गए.   इनका रूप संवर सकता है   अगर शुष्कता से... [पूरी पोस्ट]
writer अभिनव

कविताएं

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[03 Sep 2009 19:11 PM]

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