हमें विभाजन से बहुत प्यार है

निनाद गाथा मुझे हिंदी की अनेक संस्थाओं को निकट से जानने का अवसर मिला है. एक बात जो लगभग सभी संस्थाओं में सामान रूप से महसूस की है वह है उसका विभाजन. चाहे बंगलोर की साहित्यिक संस्था हो या चाहे हैदराबाद की, चाहे लखनऊ वाले हों या अमेरिका वाले सब विभाजित होते रहे हैं.... [पूरी पोस्ट]
writer अभिनव
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[06 Sep 2009 21:16 PM]

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