काका को टक्कर - हप्पी बर्डे टू यू अनूप भार्गव जी

निनाद गाथा नाम रूप के भेद पर काका लिख गए काव्य,नाम काम हो उलट पुलट बड़ा सहज संभाव्य, बड़ा सहज संभाव्य, मगर काका को टक्कर,नाम अनूप और काम अनूप ये कैसा चक्कर,अनुपम बेला खिली रहे जीवन में आठों याम,काव्य कला का हो सदा पर्याय आपका नाम.जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं.... [पूरी पोस्ट]
writer अभिनव
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[08 Sep 2009 02:27 AM]

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