ग़ज़ल- है फ़ासले तो बहुत पर मिली हैं राहें कहीं तो

मानसी गुज़र गया वो ज़माना, पड़ी हैं यादें कहीं तोदबी हुई है कहानी, हैं दफ़्न लाशें कहीं तोमैं जो ज़मीं पे हूँ ज़र्रा, है आसमां उसकी मंज़िलहैं फ़ासले तो बहुत पर, मिली हैं राहें कहीं तोकिया करूँ मैं दिनो-रात उसकी बातें सभी सेमेरी भी यादों से महके किसी की रातें कहीं... [पूरी पोस्ट]
writer मानसी

poetry

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 Sep 2009 21:25 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix