"फ़ुरसतिया जी " .के पांच साल और हमारे ...कित्ते हुए पूरे ? .

lavanyam-antarman श्री गणेश का आगमन गौरी कुंड की कुछ मिटटी लेकर हाथों में ,एक अकेली साँझ को , सोच रहीं माँ पारबती ,"कब आयेंगे घर , मेरे , शिव ~ सुंदर ? "केशर मिश्रित उबटन लेकर हाथों मेंफिर खूब उसे मल मल कर , उतारायूं ही, अपने गोरे अंग से , खेल खेल में ...बना दी , आकृति एक... [पूरी पोस्ट]
writer लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`
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[24 Aug 2009 16:55 PM]

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