पदन पोखरिया
यह कहानी एक कहानी का अंश मात्र है, जो मेरी माँ मेरे बचपन में सुनाया करती थीं। पूरी कहानी मुझे याद नहीं है। एक बार एक बारात पैदल ही वधू के गाँव जा रही थी। बाराती रास्ता भूल गए थे। एक गाँव से गजरते हुए देखा कि कुछ लड़कियाँ एक तालाब (पोखरा) पर नहा रही थीं।...
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Laxmi N. Gupta
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[16 Sep 2009 13:05 PM]



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