सुमेध और सोमवन् - एक पौराणिक कथा

kavyakala यह अद्भुत कथा लिंग-परिवर्तन और भक्त की महिमा के बारे में है। सच्चे भक्त की भावना को भगवान भी असफल नहीं कर सकते हैं। यह कथा स्कन्द पुराण (सन् ७००-११५० ईसवी) में आती है। एक समय वेदमित्र और सारस्वत नामके दो ब्राह्मण मित्र थे। वेदमित्र के पुत्र सुमेध और... [पूरी पोस्ट]
writer Laxmi N. Gupta
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[17 Sep 2009 10:53 AM]

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