गज़ल - प्यार भले कितना ही कर लो,
प्यार भले कितना ही कर लो, दिल में कौन बसाता है .मीत बना कर जिसको देखो, उतना ही तड़पाता है . मेरा दिल आवारा पागल, नगमें प्यार के गाता हैठोकर कितनी ही खाई पर बाज नही यह आता है . मतलब की है सारी दुनिया कौन किसे पहचाने रेकौन करे अब किस पे भरोसा, हर कोई भरमाता...
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Kavi Kulwant
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[12 Aug 2009 04:06 AM]



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