पुष्प का अनुराग

गीत सुनहरे विधु से मादक शीतलता लेशोख चांदनी उज्ज्वलता ले,भू से कण कण चेतनता लेअंतर्मन की यौवनता ले .अरुणिम आभा अरुणोदय सेसात रंग ले किरण प्रभा से,रंग चुरा मनभावन उससेप्रीत दिलों में जिससे बरसे .जल बूंदों से निर्मलता लेपवन तरंगों से झूला ले,संगीत अलौकिक नभ से लेमधु... [पूरी पोस्ट]
writer Kavi Kulwant

पुष्प की पुकार

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[03 Sep 2009 06:48 AM]

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