कॉन्ट्राडिक्शन-1

श्री कृष्णम् समर्पयामी कई निगाहे हैं... उनमें में एक पुराने गुलदस्ते के सूखे गुलाब पर टिकी है... लेकिन एक वहां से हटकर किताबों की बेतरतीब अलमारी में कुछ ढूंढ रही है... इस निगाह को वो लावारिस खत नहीं मिल पा रहे हैं जो आवारगी के दौरान लिखे गए और वो बंजारे खत इन किताबों के हुजूम... [पूरी पोस्ट]
writer देवेश वशिष्ठ ' खबरी '

यादें

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[17 Sep 2009 09:35 AM]

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