क्या करूँ आती है अब अक्सर तुम्हारी याद
कभी खुशबु सी आती हैतो महक उठतीं हैं यादेंछाजाती है सुनहरी सीवो एक अक्स उभरता हैये दिल मशरूफ रहता है उस लम्हे मैंअभी है वो पासजैसे कह रहा है कुछ ख़ासजो कभी कहा था उसनेबस एक एहसास ही है बाकीजो हर रोज रहता हैहै चेहरे पर मेरे ख़ुशीवही जो तब तुम्हारे चेहरे पर...
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आशीष
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[02 Aug 2009 15:23 PM]



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