हंस के बहाने निराशा बकलम प्रभा खेतान
मासिक 'हंस' हिन्दी की बेहतरीन पत्रिकाओं में से एक है। जाने-माने कथाकार राजेन्द्र यादव का एक अद्भुत प्रयोग। समकालीन विमर्शों और विवादों का 'हंस' सदैव केंद्र बिंदु रही है। हंस के बहाने श्री यादव अपने विचारों को हवा देते रहे हैं और हंस को भी इससे लाभ...
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दुलाराम सहारण
हिन्दी पत्रिका
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[05 Dec 2009 11:46 AM]



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