पन्द्रह अगस्त का पोरोग्राम और नेताजी का भासड़
प्रमोद ताम्बट जैसे ही नवोदित नेताजी को खबर मिली कि अबकी बार तहसील प्रांगण में उन्हें झंडावंदन करना है, तत्क्षण उन्होंने मन ही मन राष्ट्रीय गान रटना शुरू कर दिया। खास चमचे ने जब देखा कि नेताजी अपने ललाट की सलवटों का भार उठा नहीं पा रहें हैं, चिन्तामग्न से...
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vyangya
satire
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[14 Aug 2009 14:59 PM]



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