पुस्तक लिख घूरे पर डाल
प्रमोद ताम्बट कट्टर दुश्मनों की तारीफ करने के लिए आपका मन चाहे कितना भी फड़फड़ा रहा हो और हाथ की उँगलियाँ पुस्तक लिखने के लिए चाहे जितनी कसमसा रहीं हों, तब भी अव्वल तो आप ऐसी ‘अपशकुनी’ किताब लिखने की हिमाकत बिल्कुल ना करें जिसे पढ़े बगैर ही आप पर कहीं से...
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vyangya
व्यंग्य
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[23 Aug 2009 04:52 AM]



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