एक पखवाड़ा मुकर्रर है हिन्दी की मातमपुर्सी के लिए
प्रमोद ताम्बट हिन्दी भाषी होने के नाते आज के दिन हमें अपनी भाषा पर गर्व करना सिखाया गया है, मगर सच्चाई यह है कि स्वातंत्रोत्तर काल में जैसे-जैसे हिन्दी आन्दोलन फलता-फूलता पल्लवित होता गया है, वैसे-वैसे देश में हिन्दी की खटिया-खड़ी होती देखी गई है। कुछ तो...
[पूरी पोस्ट]
vyangya
satire
8
1
0
1
0
[14 Sep 2009 02:10 AM]



Shuffle








