छिन्न-मूल
'छिन्न-मूल' शीर्षक की यह संवेदनशील कहानी मौलिक रूप से २००२ में लिखी गयी थी. पहले ओडिया पत्रिका 'नवलिपि' में प्रकाशित हुई और बाद में लेखिका का कहानी-संग्रह 'सृजनी सरोजिनी' में संकलित हुई. अनुवाद का शीर्षक मैंने पहले 'जड़-हीन' रखा था, पर मुझे लगा...
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दिनेश कुमार माली
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[03 Aug 2009 05:45 AM]



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