क्षितिज
कविता -------------हत्यारे नहीं देखते स्वप्न--------------------------------हत्यारों के चेहरों पर होती है विनम्र हंसी हत्यारे कभी हत्या नहीं करते हत्यारे निर्भय हो...
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kshitij --govindmathur
sahitya
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[22 Sep 2009 05:46 AM]



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