क्षणिकाएं

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! एक...कभी हवा के झोके से तेरे छूने का अहसास होता हैकभी दूर होने पर भी तू मेरे दिल के पास होता हैबेशक कलम मेरी, स्याही मेरी, ये अहसास मेरा हैपर कभी कभी इनमे तेरी आवाज़, तेरा ही हर अल्फाज़ होता है।दो...न कोई शिकवा है खुदा से और न ही जमाने सेदर्द और भी बढ़... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

चार...

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[09 Dec 2009 06:07 AM]

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