अपनी मर्जी से कहां अपनी मर्जी के हम हैं...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! वक्त बदलता है और बदलता रहेगा... किसी के रोकने से न तो रुका है और न ही रुकेगा... जिसने भी रोकने की कोशिश की वह इसके प्रवाह में आकर बह गया।किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि इंसान पैदा होने के बाद बच्चा बनेगा, फिर जवान और अंत में बूढ़ा होकर वक्त की बनाई हुई... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

बदलाव

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[12 Dec 2009 07:34 AM]

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