ऎसी पुलिस न होना ज्यादा बेहतर है
पुलिस वालों की डाइनिंग टेबल पर, जो पकवान परोसे जाते हैं, जिस पैसे से पुलिस वाले ऐयाशी करते हैं, वह पैसा उस जनता की जेब से आता है, जिस पर वह रात दिन अत्याचार करते हैं, रुचिका की कहानी है, इस बेशर्म पुलिस की कहानी, पुलिस की जरूरत है, पर, ऎसी पुलिस न हो...
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Suresh Chnadra Gupta
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[30 Dec 2009 23:04 PM]



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