मुठ्ठी भर रेत
नया साल फिर से दस्तक दे रहा है ...और हम फिर, कुछ न कुछ प्रण कर रहे हैं अपने भविष्य के लिए ....कुछ नाप तोल रहे हैं ..क्या पाया ? क्या खोया ? ये नया साल जहाँ हम सबके लिए उम्मीदों की नई किरण लेकर आता है ,वहीँ हम सबको आत्मविश्लेषण का एक मौका भी देता है.....
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shikha varshney
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[30 Dec 2009 15:11 PM]



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