देखूंगा एक पूरा स्वप्न
अरसा पहले लिखी यह कविता आज नये साल की शुभकामनाओं के साथ) नये साल में नये साल में लिखूंगा एक पूरी कविता. गाऊंगा पूरे स्वर में कोई मुक्तिगान। ढ़ूढ़ूंगा कुछ पूरे दोस्त। भले नया न हो पर देखूंगा एक पूरा स्वप्न। जीना चाहूंगा एक पूरी ज़िदगी। भटकूंगा पूरेपन की...
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अशोक कुमार पाण्डेय
सात साल पुरानी कविता
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[30 Dec 2009 12:51 PM]



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