आपके बाप का है वतन, सेठजी
आपके बाप का है वतन, सेठजी । लूटो जितना तुम्हारा हो मन, सेठजी । लोग भूखे रहें, कोई मुद्दा नहीं कर ही लेंगे ये सब कुछ सहन, सेठजी । कोई मूरत लगे या बने मकबरा खर्च हम को ही करना वहन, सेठजी । घास हमको न डाले कोई पंच भी आपके साथ सारा सदन, सेठजी । हमको दो ग...
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joshi kavirai
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[30 Dec 2009 12:35 PM]



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