आपके बाप का है वतन, सेठजी

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai आपके बाप का है वतन, सेठजी । लूटो जितना तुम्हारा हो मन, सेठजी । लोग भूखे रहें, कोई मुद्दा नहीं कर ही लेंगे ये सब कुछ सहन, सेठजी । कोई मूरत लगे या बने मकबरा खर्च हम को ही करना वहन, सेठजी । घास हमको न डाले कोई पंच भी आपके साथ सारा सदन, सेठजी । हमको दो ग... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai
views
19
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
4
[30 Dec 2009 12:35 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix