सिर्फ़ दो पंक्तियां ,,,हमेशा की तरह (चिट्ठी चर्चा )
अब तो मुझे यकीन हो गया है कि अभी भी हमारे बीच कुछ मित्र /शत्रु हैं जिनका मकसद यहां लिखने/पढने .......हिंदी की सेवा से इतर भी की उद्देश्यों की पूर्ति में लगे हैं । और न हो तो बस कुछ भी कह सुन कर , अपनी वजह बेवजह की आपत्तियां दर्ज़ करा के माहौल को अशांत...
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अजय कुमार झा
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[30 Dec 2009 11:45 AM]



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