एक खत
बडे भैया लौट आओ अब अपना भी गांव कोई बुरा नही बड्की भाभी के पांवो की रुनझुन बडे उदास है तुम्हारी बिन तुम्हे ही ढुंढते है हर पल हर दिन ! गांवभर के बच्चे जवार भर की गाये आंचल मे सहेजे वह ठंडी हवाये कर रही तुम्हारी प्रतीक्षा लौट आओ अब ! हल वे अब भी चडमडा...
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यादभैयाखतमनुहार झोपडी
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[30 Dec 2009 11:26 AM]



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