मैं न रहूँ

अंतर्द्वंद का आइना मैं हूँ खुशियाँ हैं खट्टा-मीठा संसार है। मैं हूँ जीवन है जीवन के आदर्श हैं। मैं हूँ जिंदगी है जीने की चाह है। मैं हूँ सफलता है सफल होने की योग्यता है। मैं न रहूँ संसार नहीं जीवन नहीं आदर्श नहीं योग्यता नहीं...... [पूरी पोस्ट]
writer knkayastha
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[30 Dec 2009 07:49 AM]

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