हिचकी ने कल नींद से जगाया था...

मेरा कुछ सामान... कह दिया था सब कुछ आँखों से , फिर भी होठों को कंपकंपाया था ... थामना ना थामना थी तेरी मर्ज़ी , मैने तो अपना हाथ बढ़ाया था ... बुला रही थी या कहा था अलविदा , देर तक हाथों को हिलाया था ... करता हूँ इंतज़ार रोज ख्वाबों में , ख्वाब ख्वाबों का तूने दिखाया... [पूरी पोस्ट]
writer अम्बरीश अम्बुज
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[30 Dec 2009 07:06 AM]

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