सुधि उमड़ती रहे बदलियों की तरह ...
सुधि उमड़ती रहे बदलियों की तरह । तुम झलकते रहो बिजलियों की तरह ॥ प्रभु हृदय में मेरे तुमको होगी घुटन मैने गंदा किया सारा वातावरण ऐसे हिय में बिरह की सलाई लगा प्राण सुलगें अगरबत्तियों की तरह ||1|| दृष्टि बस फे...
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हिमांशु । Himanshu
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[30 Dec 2009 06:21 AM]



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