विदा नई शुरुआत के लिये

हृदय गवाक्ष यूँ ये वर्ष जाते जाते कुछ ऐसा कर गया कि सारहीन संसार के विषय में फिर से सोचना पड़ गया..मगर ऐसा तो होता ही है, जब जब कोई ऐसी घटना घटती है जिसके लिये हम तैयार भी नही होते और चाह कर भी कुछ नही कर सकते, तब तब, ईश्वर, सृष्टि, पुरुषार्थ आदि आदि पर प्रश्नचिह... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान
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[30 Dec 2009 06:06 AM]

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