इनायत हो जाए
मैं डूब सकूँ इन आँखों में जो तेरी इजाजत हो जाए इक डर भी दिल के कोने में कुछ तुमको शिकायत हो जाए जुल्फों की छाँव घनेरी हो जहाँ बैठ तपिश पे गीत लिखूँ साँसों की गिनती हो सरगम समझो कि इबादत हो जाए तन भी सुन्दर मन भी सुन्दर है प्यार तुम्हारी आँखों में पहच...
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श्यामल सुमन
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[29 Dec 2009 23:03 PM]



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