लगभग दो दिन... (द्वितीय भाग)

मेरा कुछ सामान... एक ऐसी ट्रेन, जिसमें चढ़ना कोई चाहता नहीं, और उतरने कोई बचा नहीं, रुकी है ऐसे स्टेशन, जहाँ कोई नजर नहीं आ रहा...   घंटों रुक कर जब ट्रेन खुली, जल्दी ही दुबारा रुक गयी, ड्राईवर ने inverse function लगा दिया शायद...... [पूरी पोस्ट]
writer अम्बरीश अम्बुज
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[29 Dec 2009 12:41 PM]

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