साहबी संस्कृति-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (boss culture-hindi satire poem)

दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर वह झूल जाते हैं। -------------------- नयी दुनियां में पुजने का रोग सभी के सिर पर चढ़ा है। कामयाबी का खिताब नीचे से ऊपर जाता साहब की तरफ नाकामी की लानत का आरोप... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप
views
18
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[29 Dec 2009 12:32 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix