साहबी संस्कृति-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (boss culture-hindi satire poem)
दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर वह झूल जाते हैं। -------------------- नयी दुनियां में पुजने का रोग सभी के सिर पर चढ़ा है। कामयाबी का खिताब नीचे से ऊपर जाता साहब की तरफ नाकामी की लानत का आरोप...
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दीपक भारतदीप
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[29 Dec 2009 12:32 PM]



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