नए साल की शुभकामनाएं
कविता-- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना नए साल की शुभकामनाएं ! खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को नए साल की शुभकामनाएं ! जांते के गीतों को बैलों की चाल को करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को नए साल की शुभकामनाएं ! इस पकती रोटी...
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Geetashree
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[29 Dec 2009 09:21 AM]



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