नए साल की शुभकामनाएं

नदिया बहती जाए कविता-- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना नए साल की शुभकामनाएं ! खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को नए साल की शुभकामनाएं ! जांते के गीतों को बैलों की चाल को करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को नए साल की शुभकामनाएं ! इस पकती रोटी... [पूरी पोस्ट]
writer Geetashree
views
28
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
1
[29 Dec 2009 09:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix