एक अलग पगडंडी
तराजू के पलड़े की तरह दो पगडंडियाँ हैं मेरे साथ एक पगडंडी मेरे जन्मजात संस्कारों की एक परिस्थितिजन्य ! मैंने तो दुआओं के दीपक जलाये थे प्यार के बीज डाले थे पर कुटिल , विषैली हवाओं ने निर्विकार,संवेदनाहीन पगडंडी के निर्माण के लिए विवश किया ..............
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रश्मि प्रभा...
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[29 Dec 2009 09:13 AM]



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