नव वर्ष आ रहा है

साहित्य-सहवास नव वर्ष आ रहा है उत्कर्ष आ रहा है सबके हृदय में जैसे नव हर्ष आ रहा है आओ फिर सपने देखें कुछ औरों के कुछ अपने देखें ये जानते हुए कि सपने टूट जायेंगे लुटेरे लूट जायेंगे इस बार भी बचा - खुचा हमारा सुकून पी जायेंगे फिर सारा खून हमारी देह का .......... ..... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[29 Dec 2009 06:01 AM]

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