पल भर को तुम मुड़कर तकना
अंतिम पल हैं; जाते जाते पल भर को तुम मुड़कर तकना आँसू के कुछ कतरे तन पर ओस सरीखे पड़े हुए हैं फूल तुम्हारे मुस्कानों के अंग हमारे जड़े हुए हैं सपनों के नन्हे नन्हे से कितने पौधे खड़े हुए हैं कभी किसी एकाकी पल में जिनको बोया मेरे अँगना पल भर को तुम मुड़...
[पूरी पोस्ट]
प्रताप नारायण सिंह
21
3
0
3
5
[29 Dec 2009 04:35 AM]



Shuffle








