फिर टाटा-अंबानी की सरकार क्यों न बने?
सरकार के विश्वास मत जीतने के बाद ऑफिस से घर पहुंच कर सोने की तैयारी कर रहा था, तभी मेरे एक दोस्त का फोन आया। विचारधारा के स्तर पर हम दोनों विपरीत धुरी पर हैं। फिर भी दोनों ही इस बात पर सहमत थे कि सरकार जीत गई लेकिन इस सब में कहीं न कहीं संसद, लोकतंत्...
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प्रभाष कुमार झा
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[23 Jul 2008 02:22 AM]



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