कभी-कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है

मेरा मत बचपन से सुनते आया हूं कि मुग़ल बादशाह जहांगीर जब पहली बार कश्मीर पहुंचे, तो यहां की वादियों को देखने के बाद उनके मुंह से निकला था, 'जन्नत कहीं है तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है।' इस लाइन को सोच-सोच कर कश्मीर देखने की इच्छा भी मेरे उम्र के साथ बढ़ती... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाष कुमार झा
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[29 Aug 2008 05:01 AM]

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