मेरी सखी -मेरी डायरी !
नमस्कार मित्रों , हर कवि या लेखक की एक डायरी होती है | आपकी भी होगी , है न ? एक सहचरी की तरह साथ रहती है हमारे , हमेशा ... कहीं एक कन्धा बन जाती है , भीगने के लिए तो कहीं एक मित्र - जीवन के पदकों को झिलमिलाने के लिए ! ज्यों - ज्यों वक्त गुज़रता है ,...
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kavitaprayas
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[19 Aug 2008 15:07 PM]



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