चुनाव के खेल में अलगाव का जहर

अभिवर्ल्ड चाचा हंगामी लाल का पिछले कई दिनों से कोई संदेश नहीं था। जाहिर है हमें उनकी चिन्ता होनी थी सो हुई। दफ्तर की व्यस्तताओँ के बीच आज कल करते करते आखिर हमने थोड़ा वक्त निकाला और पहुंच गए उनके घर। मन में घबराए हुए तमाम आशंकाओं को साथ हमने घर की कुण्डी खटखटा... [पूरी पोस्ट]
writer abhishek
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[20 Mar 2009 15:06 PM]

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