वो मासूम

dream of our life कहां से शुरू करूं कब से..... ट्रेन का लंबा सफर और वो बिल्कुल अकेली बैठी खिड़कियों से बाहर टकटकी लगाए उन तेजी से पीछे भागते पेड़ों को निहारे जा रही थी। शायद वो उन्हें देखकर भी नहीं देख पा रही थी, क्योंकि वो वहां मौजूद जरूर थी पर वहां थी नहीं। जैसे मान... [पूरी पोस्ट]
writer wo bhor ki nanhi kiran
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[13 Oct 2008 09:31 AM]

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