गजबण नार
बात करे तो बोल सुहाणा चंचल नैन कटार, कर सोल़ा सिणगार चाली देखो गजबण नार। सिर माथे बोरलो सुहावै, नाक नथणिया हिलती जावै, पैर धरै तो टणका बाजै हिवड़ा दमके हार। कर सोल़ा सिणगार, चाली देखो गजबण नार। गजभर घूंघट, माथे पर लट, सिर पर धर घट, चाली पनघट, भरे बेवड़...
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ghanichokhi
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[13 Jun 2009 15:47 PM]



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