patrika
पत्रिका´ सब सूं न्यारी छ मायड़ ममता सूं ज्यो प्यारी, राजस्थान पत्रिका हारी, खबरां बांचै लोग हजारी, या की साख निराळी छ, पत्रिका´ सब सूं न्यारी छ। बरसां पैली पांव जमाया, जाणै कतरा दुज्ख बिसराया, पण वे कदै नहीं घबराया, बाबो´ हिमत राखी छ, पत्रिका´ सब सू...
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ghanichokhi
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[13 Jun 2009 16:15 PM]



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