चंद्रमा की धरती पर पड़े भारतीय के कदम
अब मैं अपने नीचे छोटे घर तथा बस्ती देख रहा था और मुझे यह जान पड़ता था कि मैं एक विचित्र नगर में उतर रहा हूँ। ठीक मेरे नीचे छोटे-छोटे मनुष्यों का एक समूह एकत्र था, जोकि न तो कुछ शब्द उच्चारण करते और न मेरी सहायता करने पर कुछ उत्साह दिखाते थे, पर मूढ़ों...
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अर्शिया
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[06 Nov 2008 03:09 AM]



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