जिन स्वरूपी प्रभु हो तुम

कुन्दकुन्द कहान जो जिनेन्द्र है वैसा ही मैं हूँ ऐसा मनन करो ; अरे.. रे.. रे.. मैं अल्पज्ञ हूँ मेरे में ऐसी कोई ताकत होती होगी ?? ये बात रहने दे भाई !! मैं पूर्ण परमात्मा होने लायक हूँ --- ऐसा भी नहीं किंतु मैं तो पूर्ण परमात्मा अभी ही हूँ ऐसा मनन करो !! आहा .. हां..... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया
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[12 Jan 2009 23:39 PM]

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