तमाशबीन बने रहेंगे सफेदपोश

कसूर किसका बड़े मियां वे दिल्ली दहलाते रहे ये पोशाक बदलते रहे वे दर्द से कराहते रहे ये केश संवारते रहे फिर भी उन्हें मिली क्लीन चिट मिलती भी क्यों ना चुनाव में होना जो है हिट छोटे मियां पहले राज्य सरकारों को कोसने से थे थकते नहीं अब कहते हैं एक अरब अवाम की सुरक... [पूरी पोस्ट]
writer सचिन मिश्रा
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[15 Sep 2008 11:32 AM]

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