क्योंकि तू बेकसूर है

कसूर किसका दिल्ली इतनी महफूज न होती तो फिर क्यों दहलती आतंकी पहले ई-मेल करते हैं फिर फोन करते हैं मगर वो नहीं जागते हैं तब विस्फोट करते हैं बेकसूर निशाना बनते हैं फिर अफरा-तफरी मचती है तब उनकी नींद खुलती है और चौकसी बढ़ती है फिर बयानबाजी शुरू होती है कोई कहता ह... [पूरी पोस्ट]
writer सचिन मिश्रा
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[27 Sep 2008 11:02 AM]

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