हबीब जी से मेरी पहली और आखिरी मुलाक़ात

आवाजें - बेखौफ गूंज़ती हुई हिन्दी समय कार्यक्रम चल रहा था, और मशहूर रंगकर्मी और निर्देशक हबीब तनवीर जी के नाटक “चरणदास चोर” देखने के लिए भीड़ लगी हुई थी| मैं हमेशा की तरह कार्यक्रम का फिल्मांकन कर रहा था| ज्यों ही कार्क्रम ख़त्म हुआ सारी भीड़ बस हबीब जी क... [पूरी पोस्ट]
writer Ajay Saklani
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[23 Jun 2009 16:19 PM]

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