ग्लोबल लोगों का लोकल चेहरा

संजय उवाच कथित ग्लोबल लोग अपने व्यावसायिक फायदों के इतर सोचते ही नहीं हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर संबंध कैसे कायम रह सकते हैं? देशों की भौगोलिक रेखाएं लोगों के दिलों पर छाई हुई हैं लगभग सौ साल पहले नस्लवाद के खिलाफ लड़ने वाले गांधी बाबा ने साठ साल... [पूरी पोस्ट]
writer dr sanjay mishra
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[20 Jun 2009 07:35 AM]

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